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अनन्तः पुत्र तु तत्कृत्वाः महाप्रकाश अर्धमातास्य प्रदधात् अर्धनारी मां छाया पात्र विधानतः मां शिव पुत्रस्य गोदानाम् नमः


|| गुरु च ब्रम्हा गुरु च विष्णु गुरु च महेश्वरः। सदाचार गुरुम्वे धारयन्ति शिवज्ञेयः विशुद्धानन्द गुरुम्यो नमः ||

यह साधना काशी में एक अतिरहस्मय अतिगुप्त भैरवी कुमारी अंजना उपाध्याय (मां की शिवपुत्री) जिनका अवर्भाव 25 सितम्बर सन 1967 और तिरोभाव 13अप्रैल सन् 2021 को हुआ है इनके सानिध्य में मैं अशोक कुमार दुबे (मां का शिवपुत्र) ने साधना किया हैं। मैने अपनी प्रथम दिक्षा श्री दशर्न मुनि (कामाख्या तंत्र आश्रम, गाय घाट वाराणसी) जी से श्री विद्या (श्री महात्रिपुर सुन्दरी मां) कि दिक्षा प्राप्त किया और कुमारी अंजना उपाध्याय ने भी गुरु जी से श्री विद्या (मां त्रिपुर भैरवी) कह दिक्ष्रर प्राप्त की श्री गुरु देव ने हम दोनों की पूजा को एक कर पूजन करने का आदेश दिया। इसी उपरान्त हम दोनों को श्री गुरुदेव विशुद्धानन्द जी के कानन आश्रम में नवमुण्डी पीठ का ज्ञान उनके भक्तगणों के द्वारा हुआ। वहाँ हम दोनों के जाने के उपरानत श्री श्री गुरु देवजी की हमपर अमृत कृपा हुई और नवमुण्डी पीठ से गुरु देव सूर्य विद्या से साधना प्रारम्भ करावाई फिर उन्ही के मार्ग दर्शन में अनेको योगिनी मां और देव गुरुओं जी लोगों के समक्ष अनेको साधना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । उसी उपरान्त अर्धयोगिनी मां का अवतरण हुआ अर्धनारी मां ने हमें अपने आंचल में रखकर महाप्रकाश अर्धा मां की साधना करवाया। यहाँ मैं महाप्रकाश अर्धा मां के बारे में बताना अतिआवश्यक है। महाप्रकाश अर्धा मां दशमुखी महाकालीं मां औश्र बाबा महाकाल की पुत्री है ईश्वरी जगत में यह सबसे छोटी मां है। महाप्रकाश अर्धा मां के कुल में अर्धाग्नी मां, अर्धनारी मां (अर्धयोगिनी मां विराट योगनी मां और विकट योगनी मां है और पृथ्वी पर मानव लोक में प्रथम बार मां की साधना और उपासना हो रही है। समस्त मानव प्राणी में आत्म तत्व का संचालन इन्ही के प्रेरणा से होता है। यह अत्यन्त करुणामयी और बहुत ही रौद्र स्वरुपा है। अर्धनारी मां (अर्धयोगिनी मां) की सबसे छोटी योगनी मां है पर अत्यन्त शक्ति शाली और रौद्र रुपणी है। इन्होंने हम मानव बालकों को अपने गोदनाम आंचल में शिवपुत्र शिवपुत्री को लेकर साधना करवाया है। इसी सााधना का कुछ अंश मैने यहाँ मानव कल्याण हेतु आगे प्रस्तुत किया है।